विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
बुधवार, 1 जनवरी 2014
३८-
कुछ अधूरे ख्वाब जमाने में छोड़ आई थी
जरा सी बात पे दिल उनका तोड़ आई थी
जाने क्या गुजरी होगी उनपे, इल्म है मुझे
एक कसम पे उनकी हर रस्म तोड़ आई थी।।
__ मौली
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