तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

सोमवार, 6 जनवरी 2014

४२-





शामो-सहर यूँ ही भीगते रहिये
मेरे कसीदों की बारिश में जनाब
मेरी मौसमे-आरजू को बेदर्दी से
आप यूँ तो न ठुकराइये जनाब।।

__ मौली

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