तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

बुधवार, 8 जनवरी 2014

४९-





मुद्दतों बाद पूछती मेरी ही परछाईं मुझसे
अजनबी सी लगती क्यों कह दो मुझसे
आँखें कह गईं वो जो दिल में न था मेरे
खामोशी कह गई दास्ताँ दिल की मुझसे।।

__ मौली

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