विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
सोमवार, 6 जनवरी 2014
४१-
कभी चाँद चमका ग्रहण में घिर कर
कभी सूर्य निकला बादलों में छिपकर
वक्त गम का यूँ ही नहीं गुजर जाता
हम आप ही गुजर जाते हैं अक्सर।।
__ मौली
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