तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

बुधवार, 8 जनवरी 2014

५१-




तन्हाई थी जागी-जागी सी कल रात
माहौल था जागा-जागा सा कल रात
चाँद भी था खामोश-उदास-गुमसुम सा
शायद गम में मेरे था शामिल कल रात।।

__ मौली

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