तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 8 मार्च 2015



फ़िज़ाओं में कैसी ये प्यास है 
शायद पतझड़ में बरसात है
 न बहार में अब वो खुमार है 
न समां में अब कुछ शुमार है।।
                __ मौली

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