विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
गुरुवार, 5 मार्च 2015
१३३-
उस मासूम की थी अनगिनत आसमां-बोस ख्वाहिशे
परवाज़ के पहले ही पँख कतर दिये उन ज़ाहिदों ने।
__ मौली
आसमां-बोस = नभस्पर्शी
ज़ाहिद = जप-तप करने वाला
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें