विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
रविवार, 1 मार्च 2015
१२३-
शबे-वस्ल की चाँदनी बयाँ कर रही राज
शबनम बन उतरूं मैं उनके आँगन आज।
__ मौली
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