तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
गुरुवार, 5 मार्च 2015
१२९-
पाकीजा इश्क के धागों से बुने रिश्तों की
हिजाब ओढ़े तेरे कूचे में आई मेरे हबीब
गर होती तुझमें वफ़ा निभाने की ताबोंतबाँ
तो उम्र हमने यूँ पशेमानी में न गुजारी होती।।
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