तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 1 मार्च 2015

१२१-





खिज़ा ने शाखों से पत्तों को जुदा क्या किया
पँछियों ने देखो अपना बसेरा ही बदल लिया
कभी छाँव में आश्रय लेता था काफ़िला मगर
आज ठूँठा पड़ा दरख्त और पसरी वीरानियाँ।।

__ मौली

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