विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
गुरुवार, 5 मार्च 2015
१३१-
मोम सी पिघलती रही और रोशनी से आबाद करती रही तेरी राह के अँधेरे
पर तूने तो रिश्तों के दर्मियाँ जमती बर्फ़ को हटाने की जहमत भी न उठाई।
__ मौली
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