तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
गुरुवार, 19 मार्च 2015
कभी बसंत. तो कभी. पतझड़. सी लगी ज़िन्दगी अपनों. को. पास. लाने. की. ता-उम्र की दीवानगी कितनी ही ख्वाहिशों को न पा सकने की तिष्नगी ठोकरों से हताहत होकर भी करते रहे तेरी बन्दगी।।
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