विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
बुधवार, 25 मार्च 2015
कल शब् रोए हम यूँ ज़ार ज़ार
रिश्तों को होते देख तार तार
चुभोते रहे रोज़ शब्दों के खार
मर मर के जीते रहे हम हर बार।।
।।मौली।।
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