विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
मंगलवार, 3 मार्च 2015
१२७-
मेरी नासमझ उलझी ज़ुल्फ़ों में प्रेम का जो पुष्प लगाया तूने
अपनी ज़िन्दगी को खुद ही किन उलझनों में उलझाया तूने।
__ मौली
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