तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 1 मार्च 2015

११९-




बेईमान बहुत है ये बेदर्दी दिल
न माने बतियाँ ये हरजाई दिल
टूटता बिखरता ये मर्माहत दिल
रमता भी सिर्फ़ तुझमे मेरा दिल।।

__ मौली

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