तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

गुरुवार, 5 मार्च 2015

१३०-





तेरे बाहों का वो घेरा था जैसे चाँद का था हाला
इश्क का वो पहला बोसा लगे सप्तसुरों का झाला।

__ मौली

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