तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

गुरुवार, 12 मार्च 2015


चाँद की रौशनी और तारों की जगमगाहट से झिलमिलाता है ये जग सारा
मायूसी और तन्हाई के आलम में सिसकती रात के दर्द को किसने है जाना।
                                  ~~~~मौली~~~~

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