गुमसुम सी बैठी मैं
किसी की यादों में खोई
आँखों से नींदें,
होठों से मुस्कान भी गुम है,
अचानक दिल में एक हूक सी उठी,
आत्मा रोई, हृदय चीत्कार उठा,
पर, आँख न जाने आज क्यों न रोई,
अचानक एक आँसू मेरी आँख से टपका,
मैंने पूछा, अरे तू क्यों बाहर छलक आया,
आँसू बोला, मैं कैसे रहूँ आँखों में,
वहाँ तो पहले से ही कोई और बसा है,
अब मेरी यहाँ क्या दरकार
अब न रहा मेरा इन आँखों से कोई सरोकार.....।।
__ मौली

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