फ़िसलती जा रही ज़िन्दगी मुठ्ठी से रेत की मानिन्द
कतरा-कतरा सा लहू भी ज़ज़्ब होता सा लगे
ज़िन्दगी खफ़ा है मुझसे आज न जाने क्यों
और तुम दिल लगाने की बात करते हो
डबडबाई-बुझती आँखों से मुस्कुराने की बात करते हो
मद्धिम होती बुझती साँस से लौ लगाने की बात करते हो
क्यों श्मशान से वापस आने की बात करते हो......
...... श्मशान से वापस आने की बात करते हो......।।
__ मौली

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