तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

२३-





बदलते हुए मौसम के हर रुख को देखा
तूफ़ान में डूबती हुई कश्तियों को देखा
परिन्दों के उजड़ते हुए घोसलों को देखा
कुदरत के खौफ़नाक मँजर से परे हमने
इंसान की बदलती हुई फ़ितरत को देखा।।

__ मौली

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