तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

२५- मेरे शब्द मुझसे ही रूठ गये






आज मेरे शब्द मुझसे ही रूठ गये
कहीं मात्रा तो कहीं छन्द छूट गये
मन में है वेदना, आत्मा पे है बोझ
आँखों में हैं आँसू, दिल है पुरसोज़
होठों पे आह जैसे डूबती हुई सदा
खुद से ही खुद हो गई आज मैं ज़ुदा
लगता है इसी लिये ही शायद.....
आज मेरे शब्द मुझसे ही रूठ गये..
आज मेरे शब्द मुझसे ही रूठ गये.. ।।

__ मौली

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