विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
गुरुवार, 5 दिसंबर 2013
१६-
शमा जलती रही तड़फ़ कर रातभर
परवाना भी जला किया रातभर
मकरँद की चाह में भौंरा भी देखो
कैद होता रहा गुले-आगोश में रातभर।।
__ मौली
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें