तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
गुरुवार, 5 दिसंबर 2013
१८-
तपते मौसम की तपिश से कुम्हलाई थी मैं
आई जो सदा तेरी फ़िर से खिल उठी हूँ मैं
तेरे निर्बाध प्रेम की महक से खिंची आई मैं
तेरे इश्क में एक उम्र क्या हर उम्र वार दूँगीं मैं।।
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