विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
सोमवार, 30 दिसंबर 2013
३२- अश्क अपने पीते रहे
दर्द सहा न जाता मगर
दर्द फ़िर भी सहते रहे
मौत की ख्वाहिश में
हम तमाम उम्र जीते रहे
सिसकियों को दफ़्न कर
अश्क अपने हम पीते रहे।।
__ मौली
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