तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
गुरुवार, 5 दिसंबर 2013
१५- चुपके से
ख्वाबों में क्यों चले आते हो चुपके से
मेरे दिल की अनछुई धड़कन को
क्यों छेड़ जाते हो चुपके से
तुम बिन अधूरी हूँ ये जानकर भी
क्यों ठिठोली कर जाते हो चुपके से।।
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