तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

३६-




गमों का बोझ तो उठाते रहे हैं हम जमाने से
जब ज़िन्दगी बोझ बन जाये उसे उठायें कैसे।

__ मौली

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