तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 15 फ़रवरी 2015

९०-





हम ढूँढ़ते रह गये अपना वजूद खुद को समेट कर
मुझे अपनो ने ही बिखरा दिया पराया बना कर।

__ मौली

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