विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
सोमवार, 16 फ़रवरी 2015
९३-
मिलन की आरजूओं को तुम
मुखरित कर पाये कब भला
गुजरते वक्त के कोलाहल में
आस का पँछी नीड़ तज चला।।
__ मौली
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