विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
सोमवार, 16 फ़रवरी 2015
९२-
दायरे उनके इतने भी न थे कि लाँघ कर मुझ तक आ न सकें
बिसरा कर यूँ आज चल दिये यायावर मुझको बना गये।
__ मौली
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