विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
रविवार, 15 फ़रवरी 2015
८८-
उश्रृंखल हो उठती है जब हृदय की पीड़ा
शूल सी चुभती तब प्रीत की तरंगित वीणा।
__ मौली
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