तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

बुधवार, 11 फ़रवरी 2015

७६-





तुम जो बिछुडे मुझसे सहर न आई कभी
शब ही शब आई हर रोज शब के बाद।

__ मौली

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें