तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
गुरुवार, 26 फ़रवरी 2015
११३-
जब से लगी तेरे प्रेम की उबटन मेरे अँग-अँग
मैं निखरी सँवरी मैं इठलाई पिया तेरे रँग-रँग
पखावज की थाप न भाए, भाए मुरलिया धुन
बाँध घुँघरू प्रीत की नाचूँ कृष्णा तेरे सँग-सँग।।
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