तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

१०४-





मेरी इश्क की फ़कीरी भी क्या खूब रँग लाई है दोस्तों
के अब हर अंदाज़ हो चला है मेरा सूफ़ियाना ऐ दोस्तों।

__ मौली

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