तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2015

९९-





माली से अपेक्षित ये कैसा पुष्प खिला चमन में
न देव पे ही अर्पित हुआ कभी, न ही कफ़न पे।

__ मौली

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें