तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 15 फ़रवरी 2015

८६-






मुझे पाने की ख्वाहिश में जो अनगिनत सपने संजोता था
आज वही दिन रात मुझसे जुदा होने की वजह तलाशता है।

__ मौली

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