तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 1 फ़रवरी 2015

७१-





जिसके आने से फ़िज़ायें झूम उठी
पंछी के कलरव से उपवन झूम उठा
हृदय मिलन की खुशी सँभाल न पाये
वस्ल की चाह में रो-रोम झूम उठा।।

__ मौली

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