विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
गुरुवार, 26 फ़रवरी 2015
११६-
खुद की खुशियों के खातिर मुझको रुसवा करते क्यों हो
खुद को रहबर बता कर मुझको यूँ गुमराह करते क्यों हो।
__ मौली
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