विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2015
८१-
दिल का दर्द उभरता है होठों से एक आह बन कर
सब्र का पैमाना छलकता है अक्सर सैलाब बन कर।
__ मौली
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