तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2015
८३-
उस नन्ही सी चिड़िया के सपने थे अनेक
अपने प्रेम गीतों से दुनिया को देती थी सन्देश
हठात एक नफ़रत के तीर ने उसे बींध दिया
सारे सपने चूर-चूर कर धराशायी कर दिया।।
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