तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

१०८-





खामोशी होगी मुखर थोड़ा इंतजार तो कर
होने तक यकीं तुझपे मेरा एहितराम तो कर
सदियों से कहते आए होगा वस्ल एक रोज
आई बेला मिलन की आ अब देर तो न कर।।

__ मौली

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