तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 1 फ़रवरी 2015

७३-




मेरे तसव्वुर में आकर रात छेड़ा तूने जो दिल के तार को
उन झँकारों को मैंने सुर में बाँध सहेज लिया दिल के पास।

__ मौली

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