तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 1 फ़रवरी 2015

७२-





दोस्त बनकर मिले हैं मुझको मिटाने वाले
तुमसे बेहतर थे मेरी हार पे मुस्कुराने वाले।

__ मौली

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें