विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
मंगलवार, 24 फ़रवरी 2015
१११-
कभी रहती थी नींद इन नयनों में न की थी सपनों की दरकार
आज नींद है कोसों दूर और खुली आँखों में हैं सपने बेशुमार।
__ मौली
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