विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
सोमवार, 23 फ़रवरी 2015
१०५- मैं हूँ अलमस्त मलंग
मैं हूँ अलमस्त मलंग
नाचू मैं हो कर मगन
वीणा और मुरली सँग
गाऊँ नित्य गीत खड़ंग
रंगरेज, रंगी मैं तेरे रँग
दूर है मेरा नीड़ विहंग
मैं हूँ अलमस्त मलंग।।
__ मौली
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें