तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

सोमवार, 16 फ़रवरी 2015

९१-





फ़ासले दर्मियाँ जो आते गये इसकी तुम्हे खबर ही नहीं
दिल से मेरे जाते रहे इसका तुम्हे कोई मलाल नहीं।

__ मौली

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