विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
रविवार, 22 फ़रवरी 2015
१०१-
मैं तो बैठी ही रह गई ओढ़े बिसरी यादों का कफ़न
उसने तो न जाने कितने चोले बदल डाले अब तक।
__ मौली
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