तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

१०७-




सौगात ये मुझको वो क्या दे गया
वफ़ा के बदले क्यों ज़फ़ा दे गया
गैरत होती काश तो मर गई होती
लाश काँधों पे न मैं ता-उम्र ढ़ोती।।

__ मौली

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